Aug
4th
Tue
4th
एक बार फिर से मैं उसी सड़क पर हूँ..
एक बार फिर से मैं उसी सड़क पर हूँ..
जिसके सफ़र का कोई छोर नहीं!
बस चौराहे ही हैं, राहगीर कोई और नहीं.
ठिठकता हूँ हर बार कि मंजिल पास है शायद
मील के पत्थर का कोई जोर नहीं.
हर बार कि तरह इस बार भी,
…