19th
रुक जायेगी ज़िन्दगी उस दिन,
संतुष्ट हो गया मैं अपने से
और अपने आप से जिस दिन.
क्षुब्ध हूँ निराश हूँ तो जीवित मेरी प्यास है
भूखों-नंगो के दुखों से आहत हूँ
तो कुछ कर गुजरने की आस है
प्रश्न आते…
उगते सूरज को शीश नवाते हैं
जिससे कुछ मिल जाए, उसकी गाते हैं.
जो अस्त होता है उसे चिढ़ाते है.
सत्य क्या और नैतिकता क्या,
जो सत्तासीन है उसकी सब गातें हैं
यह अब सर्वमान्य नियम है,
काम हो तो सब…
उगते सूरज को शीश नवाते हैं
जिससे कुछ मिल जाए, उसकी गाते हैं.
जो अस्त होता है उसे चिढ़ाते है.
सत्य क्या और नैतिकता क्या,
जो सत्तासीन है उसकी सब गातें हैं
यह अब सर्वमान्य नियम है,
काम हो…
एक बार फिर से मैं उसी सड़क पर हूँ..
जिसके सफ़र का कोई छोर नहीं!
बस चौराहे ही हैं, राहगीर कोई और नहीं.
ठिठकता हूँ हर बार कि मंजिल पास है शायद
मील के पत्थर का कोई जोर नहीं.
हर बार कि तरह इस बार भी,
…
एक बार फिर से मैं उसी सड़क पर हूँ..
जिसके सफ़र का कोई छोर नहीं!
बस चौराहे ही हैं, राहगीर कोई और नहीं.
ठिठकता हूँ हर बार कि मंजिल पास है शायद
मील के पत्थर का कोई जोर नहीं.
हर बार कि तरह इस बार भी,
…